अगर आप जानना चाहती हैं कि प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) कब करना चाहिए, तो सबसे अच्छा समय आमतौर पर पीरियड रुकने के पहले दिन से माना जाता है। कई घर पर किए जाने वाले प्रेग्नेंसी टेस्ट असुरक्षित संबंध बनने या अंडा निकलने के लगभग 7-14 दिन बाद प्रेग्नेंसी के संकेत पकड़ सकते हैं। लेकिन बहुत जल्दी टेस्ट करने पर गलत नतीजा आने की संभावना रहती है।
सबसे सही नतीजे के लिए सुबह की पहली पेशाब का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर में प्रेग्नेंसी हार्मोन (hormone) की मात्रा ज्यादा होती है। अगर टेस्ट बहुत जल्दी कर लिया जाए, तो हार्मोन कम होने की वजह से रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है, जबकि प्रेग्नेंसी हो चुकी हो।
हर महिला के शरीर में बदलाव अलग तरह से होते हैं। कुछ महिलाओं में हार्मोन जल्दी बनता है, जबकि कुछ में थोड़ा समय लगता है। इसलिए अगर पहला टेस्ट नेगेटिव आए लेकिन पीरियड फिर भी न आए, तो 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करना अच्छा रहता है।
घर पर किया जाने वाला प्रेग्नेंसी टेस्ट शुरुआती जानकारी देता है, लेकिन कई बार सही पुष्टि के लिए खून की जांच या डॉक्टर की सलाह की जरूरत पड़ सकती है। सही समय और सही तरीके से टेस्ट करने पर सही नतीजा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रेग्नेंसी टेस्ट एक ऐसी जांच है जिससे पता चलता है कि महिला गर्भवती है या नहीं। यह जांच शरीर में बनने वाले hCG हार्मोन को पहचानती है। जब निषेचित अंडा बच्चेदानी में जाकर जुड़ता है, तब शरीर में यह हार्मोन बनना शुरू होता है। यही हार्मोन प्रेग्नेंसी का मुख्य संकेत माना जाता है।
प्रेग्नेंसी टेस्ट मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं - पेशाब से होने वाला टेस्ट (urine test) और खून की जांच (blood test)। घर पर इस्तेमाल होने वाली किट आमतौर पर पेशाब से जांच करती है, जबकि लैब में खून की जांच के जरिए हार्मोन की सही मात्रा देखी जाती है।
शुरुआत में hCG हार्मोन बहुत कम मात्रा में हो सकता है। इसलिए बहुत जल्दी टेस्ट करने पर रिपोर्ट गलत आ सकती है। इसी वजह से डॉक्टर अक्सर पीरियड रुकने के बाद टेस्ट करने की सलाह देते हैं।
hCG एक खास प्रेग्नेंसी हार्मोन है, जो गर्भ ठहरने के बाद बनना शुरू होता है। जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, इसकी मात्रा भी तेजी से बढ़ती जाती है।
प्रेग्नेंसी टेस्ट इसी हार्मोन की मौजूदगी को पहचानते हैं। IVF इलाज में भी प्रेग्नेंसी की पुष्टि के लिए Beta hCG खून की जांच की जाती है।
घर पर किया जाने वाला प्रेग्नेंसी टेस्ट पेशाब में hCG हार्मोन की मौजूदगी को पहचानता है। अगर यह हार्मोन शरीर में होता है, तो किट पॉजिटिव नतीजा दिखाती है।
खून की जांच ज्यादा संवेदनशील मानी जाती है। यह शुरुआती दिनों में भी कम मात्रा में hCG हार्मोन को पहचान सकती है। इसलिए कई बार डॉक्टर जल्दी पुष्टि के लिए खून की जांच करवाने की सलाह देते हैं।
| टेस्ट का प्रकार | कब किया जाता है | सही नतीजे की संभावना |
|---|---|---|
| पेशाब से टेस्ट | पीरियड रुकने के बाद | सामान्य |
| Beta hCG खून की जांच | IVF या शुरुआती प्रेग्नेंसी में | बहुत ज्यादा |
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प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का सबसे सही समय आमतौर पर पीरियड रुकने के बाद माना जाता है। कई महिलाएं जल्दी नतीजा जानना चाहती हैं, लेकिन बहुत जल्दी टेस्ट करने पर गलत रिपोर्ट आने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपके पीरियड हर महीने समय पर आते हैं, तो पीरियड रुकने के 1-7 दिन बाद टेस्ट करना सबसे अच्छा माना जाता है। तब तक शरीर में hCG हार्मोन अच्छी मात्रा में बनने लगता है और सही नतीजा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
जिन महिलाओं के पीरियड नियमित नहीं होते, उनके लिए अंडा निकलने की तारीख के हिसाब से टेस्ट करना ज्यादा सही रहता है। आमतौर पर अंडा निकलने के लगभग 14 दिन बाद टेस्ट करने से बेहतर नतीजा मिल सकता है।
IVF या IUI इलाज करवाने वाली महिलाओं को डॉक्टर अक्सर embryo transfer या प्रक्रिया के लगभग 12-14 दिन बाद Beta hCG खून की जांच कराने की सलाह देते हैं। इससे गलत रिपोर्ट आने की संभावना कम हो जाती है।
अगर आपके पीरियड समय पर नहीं आए हैं, तो पीरियड रुकने के पहले दिन से ही टेस्ट किया जा सकता है। लेकिन 3-7 दिन इंतजार करने पर रिपोर्ट ज्यादा सही आने की संभावना रहती है।
कुछ महिलाओं में गर्भ ठहरने की प्रक्रिया थोड़ा देर से होती है। ऐसे में बहुत जल्दी टेस्ट करने पर रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है, जबकि प्रेग्नेंसी हो चुकी हो।
| स्थिति | टेस्ट करने का सही समय |
|---|---|
| नियमित पीरियड | पीरियड रुकने के 1-7 दिन बाद |
| अनियमित पीरियड | अंडा निकलने के लगभग 14 दिन बाद |
| IVF/IUI | प्रक्रिया के 12-14 दिन बाद |
बहुत जल्दी प्रेग्नेंसी टेस्ट करने पर शरीर में hCG हार्मोन की मात्रा कम हो सकती है। इसकी वजह से रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है, जबकि प्रेग्नेंसी हो चुकी हो।
कुछ दवाइयों, खासकर प्रजनन (reproduction) इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं, या किट का सही तरीके से इस्तेमाल न करने पर भी गलत नतीजा आ सकता है।
अगर आपका मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो पीरियड रुकने के बाद का पहला सप्ताह प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
सुबह की पहली पेशाब से टेस्ट करना ज्यादा सही रहता है, क्योंकि उस समय hCG हार्मोन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। इससे सही नतीजा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
जिन महिलाओं के पीरियड नियमित नहीं होते, उनके लिए अंडा निकलने के समय को समझना मददगार हो सकता है। इसके लिए ओवुलेशन ट्रैकिंग (ovulation tracking), ओवुलेशन किट (ovulation kit) या शरीर के तापमान पर नजर रखने जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।
अगर सही समय समझना मुश्किल हो, तो डॉक्टर की सलाह से Beta hCG खून की जांच कराना ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
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प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए सुबह की पहली पेशाब का इस्तेमाल सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि उसमें hCG हार्मोन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। शुरुआती दिनों में शरीर में यह हार्मोन कम होता है, इसलिए गाढ़ी पेशाब में इसे पहचानना आसान होता है।
रातभर कम पानी पीने की वजह से सुबह की पेशाब पतली नहीं होती। इसी कारण डॉक्टर शुरुआती प्रेग्नेंसी जांच के लिए सुबह टेस्ट करने की सलाह देते हैं। इससे गलत नेगेटिव रिपोर्ट आने की संभावना भी कम हो सकती है।
सुबह की पहली पेशाब में hCG हार्मोन ज्यादा मात्रा में होता है। अगर प्रेग्नेंसी शुरुआती अवस्था में हो, तो उसी नमूने में हार्मोन आसानी से दिखाई दे सकता है।
यह खासकर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है जो पीरियड रुकने के तुरंत बाद टेस्ट कर रही हों।
दिनभर ज्यादा पानी या दूसरे पेय लेने से पेशाब पतली हो सकती है। इससे hCG हार्मोन की मात्रा कम दिखाई दे सकती है और कभी-कभी रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है, जबकि प्रेग्नेंसी हो।
हालांकि नई और अच्छी प्रेग्नेंसी किट (pregnancy kit) दिन में भी सही नतीजा दे सकती हैं, लेकिन शुरुआती जांच के लिए सुबह का समय ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
हाँ, कुछ शुरुआती प्रेग्नेंसी टेस्ट किट दावा करती हैं कि वे पीरियड रुकने से पहले भी प्रेग्नेंसी का पता लगा सकती हैं। ये किट बहुत कम मात्रा में hCG हार्मोन को पहचानने के लिए बनाई जाती हैं।
लेकिन पीरियड आने से पहले टेस्ट करने पर सही नतीजा मिलने की संभावना कम हो सकती है। इसका कारण यह है कि हर महिला के शरीर में गर्भ ठहरने और हार्मोन बनने की प्रक्रिया अलग समय पर शुरू होती है। अगर टेस्ट बहुत जल्दी किया जाए, तो रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है।
कुछ शुरुआती जांच वाली किट अंडा निकलने के लगभग 10-12 दिन बाद प्रेग्नेंसी पहचानने का दावा करती हैं। लेकिन उनका सही होना काफी हद तक टेस्ट के समय पर निर्भर करता है।
आमतौर पर पीरियड रुकने के बाद टेस्ट करने पर ज्यादा सही नतीजा मिलता है।
कई बार गर्भ ठहर चुका होता है, लेकिन बच्चेदानी में अंडा अभी पूरी तरह जुड़ा नहीं होता या hCG हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना होता। ऐसे में टेस्ट नेगेटिव आ सकता है।
इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर पहली रिपोर्ट नेगेटिव आए, तो कुछ दिन बाद दोबारा टेस्ट करना चाहिए।
प्रेग्नेंसी टेस्ट कब पॉजिटिव आएगा, यह गर्भ ठहरने, बच्चेदानी में अंडे के जुड़ने और hCG हार्मोन बनने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। आमतौर पर असुरक्षित संबंध के लगभग 10-14 दिन बाद टेस्ट पॉजिटिव आने की संभावना होती है।
जब शुक्राणु (sperm) और अंडाणु (eggs) मिलते हैं, तो गर्भ ठहरता है। इसके बाद निषेचित अंडा बच्चेदानी की तरफ बढ़ता है और उसकी अंदरूनी परत से जुड़ जाता है। इसे इम्प्लांटेशन (implantation) कहा जाता है। इसके बाद ही शरीर hCG हार्मोन बनाना शुरू करता है।
हर महिला के शरीर में यह हार्मोन अलग गति से बनता है। कुछ महिलाओं में यह जल्दी दिखाई देने लगता है, जबकि कुछ में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। इसी वजह से एक ही समय पर किए गए टेस्ट अलग-अलग नतीजे दे सकते हैं।
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अंडा निकलने के लगभग 12-24 घंटे के अंदर गर्भ ठहर सकता है, अगर उस समय शरीर में शुक्राणु मौजूद हों।
यह प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब (गर्भाशय नलिकाएं) में होती है और यहीं से गर्भ ठहरने की शुरुआत मानी जाती है।
गर्भ ठहरने के लगभग 6-10 दिन बाद निषेचित अंडा बच्चेदानी की परत से जुड़ता है। इसे implantation कहा जाता है।
इसके बाद शरीर में hCG हार्मोन बनना शुरू होता है। यही हार्मोन प्रेग्नेंसी टेस्ट में दिखाई देता है।
ज्यादातर मामलों में संबंध बनने के लगभग 10-14 दिन बाद या पीरियड रुकने के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
अगर पहला टेस्ट नेगेटिव आए लेकिन पीरियड फिर भी न आए, तो 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करना अच्छा माना जाता है।
| संबंध बनने के बाद | शरीर में क्या होता है |
|---|---|
| दिन 1-5 | गर्भ ठहरना |
| दिन 6-10 | बच्चेदानी में जुड़ना |
| दिन 10-14 | hCG हार्मोन जांच में दिखाई देना |
घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करना आसान होता है, लेकिन सही नतीजा पाने के लिए सही तरीका अपनाना जरूरी है। ज्यादातर घर में इस्तेमाल होने वाली किट पेशाब में hCG हार्मोन को पहचानकर नतीजा दिखाती हैं।
सही समय और सही तरीके से टेस्ट करने पर भरोसेमंद नतीजा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
घर पर टेस्ट करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
सुबह की पहली पेशाब में hCG हार्मोन ज्यादा होने के कारण शुरुआती प्रेग्नेंसी पहचानना आसान हो सकता है।
कुछ आम गलतियां रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती हैं:
अगर पहली रिपोर्ट साफ न हो, तो 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करना मददगार हो सकता है।
ज्यादातर प्रेग्नेंसी किट लाइन के जरिए नतीजा दिखाती हैं। इन्हें सही तरीके से समझना जरूरी होता है।
एक लाइन यह दिखाती है कि किट ठीक से काम कर रही है। अगर दूसरी लाइन भी दिखाई दे, तो यह प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है।
| रिपोर्ट | मतलब |
|---|---|
| 1 लाइन | प्रेग्नेंसी नहीं |
| 2 लाइन | प्रेग्नेंसी होने की संभावना |
| हल्की दूसरी लाइन | शुरुआती प्रेग्नेंसी हो सकती है |
कई बार दूसरी लाइन बहुत हल्की दिखाई देती है। इसे हल्की पॉजिटिव लाइन कहा जाता है। यह शुरुआती प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है, क्योंकि उस समय hCG हार्मोन कम मात्रा में होता है।
ऐसी स्थिति में 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करना या खून की जांच करवाना बेहतर माना जाता है।
अगर किट में पहली यानी control line ही दिखाई न दे, तो टेस्ट सही नहीं माना जाता। इसका मतलब किट ठीक से काम नहीं कर रही या इस्तेमाल में गलती हुई है।
ऐसे में नई किट से दोबारा जांच करनी चाहिए।
प्रेग्नेंसी टेस्ट हमेशा पूरी तरह सही नहीं होते। कुछ स्थितियों में गलत पॉजिटिव या गलत नेगेटिव रिपोर्ट आ सकती है।
गलत नेगेटिव का मतलब है कि प्रेग्नेंसी होने के बाद भी रिपोर्ट नेगेटिव आए। वहीं गलत पॉजिटिव में रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, लेकिन वास्तव में प्रेग्नेंसी नहीं होती।
गलत पॉजिटिव रिपोर्ट कई कारणों से आ सकती है, जैसे:
कभी-कभी गर्भ ठहरने की शुरुआत तो होती है, लेकिन वह बहुत जल्दी रुक जाती है। ऐसे समय थोड़े समय के लिए hCG हार्मोन दिखाई दे सकता है और रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है।
गलत नेगेटिव रिपोर्ट अक्सर बहुत जल्दी टेस्ट करने की वजह से आती है। अगर बच्चेदानी में अंडा अभी जुड़ा नहीं हो या hCG हार्मोन बहुत कम मात्रा में हो, तो टेस्ट प्रेग्नेंसी को पहचान नहीं पाता।
बहुत ज्यादा पानी पीने से पेशाब पतली हो जाना या टेस्ट सही तरीके से न करना भी इसकी वजह हो सकता है।
PCOS जैसी हार्मोन से जुड़ी समस्याएं पीरियड का समय बदल सकती हैं। इससे सही दिन पर टेस्ट करना मुश्किल हो सकता है।
IVF इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ इंजेक्शन में hCG हार्मोन होता है। इसकी वजह से कभी-कभी रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है, जबकि असली प्रेग्नेंसी की पुष्टि अभी न हुई हो।
| स्थिति | क्या असर हो सकता है |
|---|---|
| बहुत जल्दी टेस्ट करना | गलत नेगेटिव रिपोर्ट |
| IVF इंजेक्शन | गलत पॉजिटिव रिपोर्ट |
| पतली पेशाब | हार्मोन कम दिखाई देना |
| शुरुआती गर्भ रुक जाना | कुछ समय के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट |
प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को गर्भ ठहरने के कुछ दिनों बाद ही बदलाव महसूस होने लगते हैं, जबकि कुछ में लक्षण देर से दिखाई देते हैं। सबसे आम शुरुआती संकेत पीरियड रुकना माना जाता है।
जब निषेचित अंडा बच्चेदानी में जुड़ता है, तब शरीर में हार्मोन से जुड़े बदलाव शुरू होते हैं। इन्हीं बदलावों की वजह से मतली, थकान, स्तनों में दर्द और मूड बदलने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
शुरुआती दिनों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
कुछ महिलाओं को खाने की तेज इच्छा या किसी गंध से परेशानी भी महसूस हो सकती है।
| लक्षण | कब दिखाई दे सकता है |
|---|---|
| पीरियड रुकना | चौथे हफ्ते के आसपास |
| मतली | पाँचवें-छठे हफ्ते में |
| स्तनों में दर्द | शुरुआती हफ्तों में |
| थकान | शुरुआती हफ्तों में |
| मूड बदलना | शुरुआती हफ्तों में |
PMS और शुरुआती प्रेग्नेंसी में कई लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जैसे पेट फूलना, स्तनों में दर्द और मूड बदलना।
लेकिन PMS के लक्षण आमतौर पर पीरियड शुरू होने के बाद कम हो जाते हैं, जबकि प्रेग्नेंसी में ये बने रह सकते हैं।
कुछ महिलाओं में गर्भ जुड़ने के समय हल्की खून की बूंदें या दाग दिखाई दे सकते हैं। इसे implantation bleeding कहा जाता है।
यह सामान्य पीरियड से काफी हल्की होती है और हल्के गुलाबी या भूरे रंग की हो सकती है। यह अक्सर गर्भ ठहरने के लगभग 6-10 दिन बाद दिखाई दे सकती है।
अगर खून ज्यादा आए या तेज दर्द हो, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
IVF और IUI के बाद सही समय पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करना बहुत जरूरी होता है। बहुत जल्दी टेस्ट करने पर गलत पॉजिटिव या गलत नेगेटिव रिपोर्ट आ सकती है, खासकर जब प्रजनन से जुड़ी दवाएं ली गई हों।
IVF में embryo transfer के बाद शरीर को बच्चेदानी में गर्भ जुड़ने और hCG हार्मोन बनने के लिए समय चाहिए होता है। इसी कारण डॉक्टर आमतौर पर 12-14 दिन बाद Beta hCG खून की जांच कराने की सलाह देते हैं।
IUI में भी प्रक्रिया के बाद लगभग 14 दिन इंतजार करना बेहतर माना जाता है। इस दौरान जल्दी घर पर टेस्ट करने से भ्रम हो सकता है।
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IVF में embryo transfer के बाद गर्भ बच्चेदानी की परत में जुड़ने की कोशिश करता है। सफलतापूर्वक जुड़ने के बाद hCG हार्मोन बनना शुरू होता है।
इसीलिए डॉक्टर आमतौर पर 12-14 दिन बाद Beta hCG खून की जांच करवाने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह बहुत कम मात्रा में भी हार्मोन पहचान सकता है।
IUI के बाद भी प्रेग्नेंसी पहचानने में समय लगता है। अगर बहुत जल्दी टेस्ट किया जाए, तो हार्मोन कम होने की वजह से रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है।
इसलिए प्रक्रिया के लगभग 14 दिन बाद टेस्ट करना ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
Beta hCG खून की जांच शुरुआती प्रेग्नेंसी की पुष्टि का सबसे सही तरीका माना जाता है। इससे शरीर में हार्मोन की सही मात्रा पता चलती है और प्रेग्नेंसी की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।
IVF इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन की वजह से पेशाब वाले टेस्ट कभी-कभी गलत पॉजिटिव रिपोर्ट दे सकते हैं। इसलिए कई डॉक्टर खून की जांच को ज्यादा महत्व देते हैं।
| प्रक्रिया | टेस्ट करने का सही समय |
|---|---|
| IVF | 12-14 दिन बाद |
| IUI | लगभग 14 दिन बाद |
“IVF या IUI के बाद सही समय पर Beta hCG टेस्ट करवाना सही प्रेग्नेंसी पुष्टि के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।”
अगर लगातार टेस्ट नेगेटिव आ रहे हों लेकिन पीरियड न आए हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
अनियमित पीरियड, तेज दर्द, ज्यादा खून आना या बार-बार गर्भ ठहरने में परेशानी जैसी बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
IVF या IUI इलाज करवा रही महिलाओं को कोई असामान्य लक्षण दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
अगर लंबे समय तक गर्भ नहीं ठहर रहा हो या बार-बार पीरियड अनियमित हों, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
समय पर जांच और इलाज से सफलता की संभावना बेहतर हो सकती है।
Indira IVF फर्टिलिटी जांच और आधुनिक इलाज के जरिए कई दंपतियों की मदद करता है। यहां विशेषज्ञ अंडा निकलने की जांच, Beta hCG टेस्ट, अल्ट्रासाउंड जांच और व्यक्तिगत सलाह जैसी सुविधाएं देते हैं।
अगर सामान्य तरीके से गर्भ ठहरने में परेशानी हो रही हो, तो IVF, IUI और दूसरी जांच की सलाह दी जा सकती है। हर मरीज की स्थिति के अनुसार अलग देखभाल योजना बनाई जाती है।